
बनारस का नाम आते ही आंखों के सामने गंगा आरती की चकाचौंध और गलियों का शोर आ जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस शोर-शराबे से दूर काशी का एक ऐसा चेहरा भी है जो बेहद शांत और रहस्यमयी है? अगर आप घाटों की भीड़ से ऊब चुके हैं और कुछ नया तलाश रहे हैं, तो यह गाइड आपके लिए है।
1. गुलाबी मंदिर (सिवाली वियतनामी बुद्ध मंदिर), सारनाथ

सारनाथ में लोग अक्सर धमेख स्तूप देखकर लौट आते हैं, लेकिन वहां का गुलाबी मंदिर एक छिपा हुआ खजाना है। एक वियतनामी भिक्षु द्वारा अपनी पूरी जमा-पूंजी लगाकर बनाया गया यह मंदिर अपनी 70 फीट ऊंची बुद्ध प्रतिमा के लिए जाना जाता है। मंदिर का शांत वातावरण और इसका हल्का गुलाबी रंग मन को अद्भुत सुकून देता है।
2. चीनी मंदिर (चाइनीज़ मॉनेस्ट्री), सारनाथ

1939 में बना यह मंदिर चीनी वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। लाल और सुनहरे रंगों से सजा यह मठ मुख्य सड़कों के पास होने के बावजूद बहुत शांत रहता है। यहाँ की लकड़ी की नक्काशी और प्राचीन मूर्तियां आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाएंगी।
3. कोरियन मंदिर, सारनाथ

सारनाथ के मुख्य मार्ग से थोड़ा अंदर हटकर यह मंदिर स्थित है। यहाँ की बनावट आपको सीधे दक्षिण कोरिया की याद दिलाएगी। मंदिर के अंदर भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश के दृश्यों को बहुत ही खूबसूरती से दर्शाया गया है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन जगह है जो शांति से बैठकर ध्यान (Meditation) करना चाहते हैं।
4. लाल खान का मकबरा, राजघाट

मालवीय पुल के पास स्थित यह जगह इतिहास प्रेमियों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है। यह एक मुगल सेनापति का मकबरा है, जो प्राचीन राजघाट किले के अवशेषों के बीच बना है। यहाँ के हरे-भरे बगीचे और गंगा का नज़ारा बनारस के किसी भी अन्य स्थान से बिलकुल अलग और शांत है।
5. नंदेश्वर घाट: फिल्मों वाला बनारस

अगर आप फिल्म 'मसान' या 'राँझणा' के दीवाने हैं, तो आपको नंदेश्वर घाट जरूर जाना चाहिए। यह बनारस का सबसे साफ और सुंदर घाट माना जाता है। यहाँ खड़ी पुरानी हवेली, बरगद के पेड़ और छोटा सा अखाड़ा इसे एक परफेक्ट शूटिंग लोकेशन बनाते हैं।
6. आलमगीर मस्जिद, पंचगंगा घाट

पंचगंगा घाट पर स्थित यह मस्जिद अपनी विशाल गुंबदों के लिए जानी जाती है। औरंगजेब द्वारा बनवाई गई यह मस्जिद कभी 'बेणी माधव का दरेरा' मंदिर के नाम से मशहूर थी। यहाँ की बालकनी से गंगा का जो नज़ारा दिखता है, उसे कई लोग 'मुंबई के मरीन ड्राइव' जैसा बताते हैं।
7. लोलार्क कुंड: सूर्य का रहस्यमयी कुंड

तुलसी घाट के पास स्थित यह 50 फीट गहरा प्राचीन स्टेपवेल (बावड़ी) है। मान्यता है कि इसका निर्माण प्राचीन समय में किसी उल्कापिंड के गिरने से हुआ था। निसंतान दंपत्ति यहाँ लोलार्क षष्ठी के दिन डुबकी लगाने आते हैं। साधारण दिनों में यह जगह अपनी रहस्यमयी शांति के लिए जानी जाती है।
8. फुलवारी रेस्टोरेंट और सामी कैफे

बनारस की भीड़भाड़ वाली गलियों के बीच एक पुरानी हवेली के अंदर बसा यह कैफे हरियाली से भरा है। यहाँ का 'वुड-फायर पिज्जा' और 'बनारसी थाली' का स्वाद लेते हुए आप घंटों शांति से बैठ सकते हैं।
9. तुलसी मानस मंदिर

सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर उस स्थान पर है जहाँ गोस्वामी तुलसीदास जी ने 'रामचरितमानस' के कुछ अंश लिखे थे। इस मंदिर की दीवारों पर रामायण की चौपाइयां लिखी हैं और यहाँ की चलती-फिरती झांकियां बच्चों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं।
10. दुर्गा मंदिर, रामनगर

यह मुख्य शहर के दुर्गा कुंड से अलग है। रामनगर किले से लगभग 3 किमी दूर स्थित यह 500 साल पुराना मंदिर अपनी अद्भुत नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ का शांत तालाब और चारों तरफ फैली शांति आपको शहर के शोर से कोसों दूर ले जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. इन ऑफबीट जगहों पर जाने का सबसे अच्छा समय क्या है?
अक्टूबर से मार्च के बीच का मौसम सबसे सुखद होता है। सुबह के समय घाटों की सैर और दोपहर में सारनाथ के मंदिरों को देखना सबसे अच्छा रहता है।
2. क्या लाल खान के मकबरे में प्रवेश के लिए टिकट लगता है?
फिलहाल यहाँ प्रवेश निशुल्क है और इसकी देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा की जाती है।
3. क्या ये जगहें बच्चों के साथ घूमने के लिए सही हैं?
हाँ, विशेष रूप से तुलसी मानस मंदिर और सारनाथ के मंदिर बच्चों को बहुत पसंद आते हैं।
4. नंदेश्वर घाट कैसे पहुँचें?
आप अस्सी घाट से पैदल चलते हुए या नाव के ज़रिए यहाँ पहुँच सकते हैं। यह घाट मालवीय पुल के करीब स्थित है।
5. क्या आलमगीर मस्जिद के ऊपर जा सकते हैं?
मस्जिद के मुख्य हिस्से तक जाने की अनुमति है, जहाँ से आप घाटों और गंगा का शानदार नज़ारा देख सकते हैं। सीढ़ियां थोड़ी संकरी हैं, इसलिए सावधानी बरतें।